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राहु केतु का आपकी राशि असर 2017 मैं।

राहु केतु का असर राशि पे 2017।

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क्या दान ना करें राशि के अनुसार।

राशि के अनुसार वर्जित दान साम्रगी।

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पढ़ें रुद्राक्ष के बारे में।

रुद्राक्ष अनेक प्रकार के बताये गये हैं। ये भेद भोग और मोक्षरूपी फल देने वाले हैं।एक मुखी : एक मुखवाला रुद्राक्ष साक्षात् शिव का स्वरूप है। वह भोग और मोक्षरूपी फल प्रदान करता है। जहां रुद्राक्ष की पूजा होती है, वहां से लक्ष्मी दूर नहीं जातीं। उस स्थान के सारे उपद्रव नष्ट हो जाते हैं तथा वहां रहने वाले लोगों की सभी कामनाएं पूर्ण होती हैं।

दो मुखी : दो मुखवाला रुद्राक्ष देवदेवेश्वर कहा गया है। वह सम्पूर्ण कामनाओं और फलों को देने वाला है।

तीन मुखी : तीन मुखवाला रुद्राक्ष सदा साक्षात् साधना का फल देने वाला है, उसके प्रभाव से सारी विद्याएं प्रतिष्ठित होती हैं।

चार मुखी : चार मुखवाला रुद्राक्ष साक्षात् ब्रह्मा का रूप है। वह दर्शन और स्पर्श से शीघ्र ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – इन चारों पुरुषार्थों को देने वाला है।

पंच मुखी : पांच मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात कालाग्निरुद्ररूप है। वह सब कुछ करने में समर्थ है। सबको मुक्ति देनेवाला तथा सम्पूर्ण मनोवांछित फल प्रदान करने वाला है। पंचमुख रुद्राक्ष समस्त पापों को दूर कर देता है।

षड् मुखी : छह मुखवाला रुद्राक्ष भगवान कार्तिकेय का स्वरूप है। यदि दाहिनी बांह में उसे धारण किया जाए तो धारण करने वाला मनुष्य ब्रह्महत्या आदि पापों से मुक्त हो जाता है।

सप्त मुखी : सात मुखवाला रुद्राक्ष अनंगस्वरूप और अनंग नाम से ही प्रसिद्ध है। उसको धारण करने से दरिद्र भी ऐश्वर्यशाली हो जाता है।

अष्ट मुखी : आठ मुखवाला रुद्राक्ष अष्टमूर्ति भैरवरूप है, उसको धारण करने से मनुष्य पूर्णायु होता है और मृत्यु के पश्चात शूलधारी शंकर हो जाता है।

नौ मुखी : नौ मुख वाले रुद्राक्ष को भैरव तथा कपिल-मुनि का प्रतीक माना गया है। साथ ही नौ रूप धारण करने वाली महेश्वरी दुर्गा उसकी अधिष्ठात्री देवी मानी गयी हैं। शिव कहते हैं, ”जो मनुष्य भक्तिपरायण हो अपने बायें हाथ में नौ मुख रुद्राक्ष को धारण करता है, वह निश्चय ही मेरे समान सर्वेश्वर हो जाता है – इसमें संशय नहीं है।”

दश मुखी : दस मुखवाला रुद्राक्ष साक्षात् भगवान विष्णु का रूप है। उसको धरण करने से मनुष्य की सम्पूर्ण कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

ग्यारह मुखी : ग्यारह मुख वाला जो रुद्राक्ष है, वह रुद्ररूप है। उसको धारण करने से मनुष्य सर्वत्र विजयी होता है।

बारह मुखी : बारह मुखवाले रुद्राक्ष को केश प्रदेश में धरण करें। उसके धरण करने से मानो मस्तकपर बारहों आदित्य विराजमान हो जाते हैं।

तेरह मुखी : तेरह मुखवाला रुद्राक्ष विश्वेदेवों का स्वरूप है। उसको धारण करके मनुष्य सम्पूर्ण अभीष्टों को प्राप्त तथा सौभाग्य और मंगल लाभ करता है।

चौदह मुखी : चौदह मुखवाला जो रुद्राक्ष है, वह परम शिवरूप है। उसे भक्ति पूर्वक मस्तक पर धरण करें। इससे समस्त पापों का नाश हो जाता है।

रुद्राक्षों को धारण करने के मंत्र

एक मुखी – ॐ ह्रीं नम:

दो मुखी – ॐ नम:

तीन मुखी – ॐ क्लीं नम:

चार मुखी – ॐ ह्रीं नम:

पांच मुखी – ॐ ह्रीं नम:

छह मुखी -ॐ ह्रीं हुं नम:

सात मुखी – ॐ हुं नम:

आठ मुखी – ॐ हुं नम:

नौ मुखी – ॐ ह्रीं हुं नम:

दस मुखी – ॐ ह्रीं नम :

ग्यारह मुखी – ॐ ह्रीं हुं नम:

बारह मुखी – ॐ क्रौं क्षौं रौं नम:

तेरह मुखी – ॐ ह्रीं नम:

चौदह मुखी – ॐ नम:

क्या है शिवलिंग ? स्वयं ब्रह्मा ने बताया है इसका रहस्य !

इन चौदह मंत्रों द्वारा क्रमश: एक से लेकर चौदह मुखों वाले रुद्राक्ष को धरण करने का विधान है।

नहीं सताती बुरी ताकतें

शिव महापुराण के अनुसार साधक को चाहिये कि वह निद्रा और आलस्य का त्याग करके श्रद्धा-भक्ति से सम्पन्?न हो, सम्पूर्ण मनोरथों की सिद्धि के लिये ऊपर लिखे मंत्रों द्वारा रुद्राक्षों को धारण करे। रुद्राक्ष की माला धरण करने वाले पुरुषों को देखकर भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी तथा जो अन्य द्रोहकारी राक्षस आदि हैं, वे सब के सब दूर भाग जाते हैं। रुद्राक्ष मालाधारी पुरुष को देखकर मैं शिव, भगवान् विष्णु, देवी दुर्गा, गणेश, सूर्य तथा अन्य देवता भी प्रसन्न हो जाते हैं।

पापों का नाश करने के लिए रुद्राक्ष धारण आवश्यक बताया गया है। वह निश्चय ही सम्पूर्ण अभीष्ट मनोरथों का साधक है। अत: अवश्य ही उसे धारण करना चाहिए। भगवान शिव कहते हैं, ”हे परमेश्वरी, लोक में मंगलमय रुद्राक्ष जैसा फलदायी दूसरी कोई माला नहीं है।

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क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

इंसान की तकदीर कल उसे कहाँ ले आएगी, ये कोई नहीं जानता लेकिन सदियों पुराने हस्त रेखा शास्त्र में पारंगत होने पर व्यक्ति किसी के भविष्य को लेकर संकेत ज़रूर दे सकता है. बेहद प्राचीन और गूढ़ इस शास्त्र को समझना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन जिन लोगों ने इसे पढ़ा और समझा है, उनके लिए ये बताना आसान है कि किसी व्यक्ति के जीवन में क्या हो सकता है.आज हम आपको ऐसे कुछ चिह्नों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपके हाथों पर होकर आपका भविष्य निर्धारित करते हैं।

1. मंदिर

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये चिह्न दिखाता है कि व्यक्ति जीवन में दुनिया की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करेगा और सर्वोच्च पद पर आसीन होगा. ऐसे लोग किसी देश के राष्ट्रपति भी बन सकते हैं.

2. छत्र

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

छत्र, मंडप या छाता बहुत ही दुर्लभ साइन है और इसे ज़्यादातर मामलों में आध्यात्मिकता से जोड़ा जाता है. इसके साथ ही ये राजसी योग देता है. ये राजाओं और योगियों में पाया जा सकता है.

3. ध्वज

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये चिह्न जिनके हाथ में होता है, विजयश्री उनके कदम चूमती है. ऐसे लोगों के लिए कोई भी काम कठिन नहीं होता.

4 . तलवार

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये निशान जिनके हाथ में होता है, उनके लिए दुर्भाग्य का सूचक होता है. वे लोग जीवन में चुनौतियों और संघर्ष से गुज़रते हैं.

5. वृक्ष

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये निशान हाथ की जिस भी रेखा पर बना हो, उसकी विशेषता को और बढ़ा देता है. ये भाग्य रेखा, जीवन रेखा या ह्रदय रेखा पर पाए जाने पर बहुत अच्छे परिणाम देता है. कुल मिलाकर ये बहुत ही पॉज़िटिव साइन है.

6. त्रिकोण

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

-यदि ह्रदय रेखा पर त्रिकोण पाया जाता है, तो व्यक्ति अपनी मेहनत के दम पर सफल होगा.

-जब ये मस्तिष्क रेखा पर हो तो ये दिखाता है कि व्यक्ति राजसी योग पाएगा और ये पीढ़ी दर पीढ़ी बना रहेगा.

-अगर ये निशान बृहस्पति के उच्च स्थान पर बना हो तो ऐसा व्यक्ति डिप्लोमैट हो सकता है, जो सिर्फ़ अपने बयानों से दो देशों के बीच शांति स्थापित कर सकेगा.

-अगर ये शनि के शिखर पर बन रहा हो तो व्यक्ति अदृश्य या गुप्त विज्ञान में पारंगत होता है और इसके भीतर गुप्त शक्तियां भी होती हैं.

-अगर ये निशान सूर्य पर्वत पर हो तो ऐसा व्यक्ति किसी कला में बेहद निपुण होता है, जैसे कि संगीत, नृत्य, पेंटिंग आदि.

-अगर ये बुध पर्वत पर हो तो व्यक्ति के पास ज़बरदस्त बिज़नेस सेन्स होता है और वो बहुत बुद्धिमान होता है. ऐसे लोग डिप्लोमैट के पद पर भी पहुंच सकते हैं.

-अगर त्रिकोण का ये निशान हाथ में मंगल पर हो तो शख़्स मार्शल आर्ट्स, ताइक्वांडो, कुंगफ़ू में पारंगत होता है और कई शस्त्र चलाना जानता है.

-अगर ये त्रिकोण शुक्र पर्वत पर पाया जाता है तो व्यक्ति अपने साथी को बेहद प्रेम करने वाला होगा.

7. त्रिशूल

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये बेहद सौभाग्यकारक निशान है. जो सूर्य या बृहस्पति पर्वत पर पाया जा सकता है. ये आपको जीवन में प्रसिद्धि देता है और सेलेब्रिटी जैसा दर्ज़ा भी.

8. अंडाकार या जौ के आकार का निशान

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

-इसे लेकर लोगों में कई मत हैं. जब ये अंगूठे के निचले पोर में पाया जाता है तो ये धन और मिला-जुलाकर सफलता का सूचक होता है.

-जब ये अंगूठे के बेस में पाया जाता है, तो इसे बेटे की निशानी मानते हैं.

-जब ये भाग्य रेखा की शुरुआत में हो, तो माता-पिता की अल्पायु में मृत्यु का संकेत देता है.

9. मत्स्य या मछली

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये निशान मणिबंध रेखा के ऊपर पाया जाता है. ये मार्क अगर बड़ा, बिना कहीं से कटा हुआ और साफ हो तो ये ज़िन्दगी में चमत्कार करने वाला है.

10. कछुआ

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये निशान व्यक्ति को बहुत ही भाग्यवान बनाता है.

11. कमल का निशान

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये बहुत ही दुर्लभ निशान है, जो शासकों के हाथों में देखने को मिलता है, या फिर उनके, जो जीवन को एन्जॉय करते हैं. ये व्यक्ति के चरित्र की पवित्रता और जीवन में बसी आध्यात्मिकता को भी दर्शाता है.

12. रथ का चिह्न

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये चिह्न अकसर राजाओं के हाथ में पाया जाता है, जो जीवन के सारे सुख प्राप्त करते हैं.

13. स्वास्तिक

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

​ये बेहद शुभ निशान है, जो व्यक्ति को धर्म और सन्मार्ग पर ले जाता है. ऐसे लोग उच्चतम पदों पर पहुंचते हैं. यहां तक कि लोग इनकी पूजा करने लगते हैं.

14. सिंह का चिह्न

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये निशान जातक को हद से ज़्यादा बहादुर और हिम्मती बनाता है. ऐसे लोग ऊर्जा से हमेशा भरे रहते हैं.

15. धनुष

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ऐसे लोग बहुत नेक होते हैं और उनका पूरा जीवन दूसरों की भलाई में गुज़रता है. उन्हें एक बेहतरीन लाइफ़ पार्टनर मिलता है और शादीशुदा जीवन शांतिपूर्ण गुज़रता है. ऐसे लोगों का भाग्य विवाह के बाद चमक उठता है.

16. चक्र

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ऐसे लोग बेहद धनवान, सुख-सम्पदा से पूर्ण और अच्छे होते हैं. ये जातक भगवान विष्णु के भक्त होते हैं. वे किसी राजा से कम नहीं होते.

17. अंकुरित बीज

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

ये आलीशान और आरामपरस्त ज़िन्दगी की निशानी है.
18. जलाशय

क्या आपके हतेली में है ऐसे निशान?

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PITRU PAKSHA

Expressing Gratitude towards our ancestors.
We have taken all the things that we have today for granted. But without the generations that came before us, firstly we would not exist here; secondly, without their contribution we would not have all the things that we have today. So instead of taking them for granted, today is a day when we express our gratitude

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